करवा चौथ विवाहित हिंदू महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस त्योहार में विवाहित महिलाएं अपने पति की सुरक्षा और लंबी उम्र के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखती हैं। करवा चौथ सबसे पसंदीदा त्योहारों में से एक है जो एक पति पत्नी के बीच के रिश्ते को दर्शाता है।
इस दिन, विवाहित महिलाएं ‘सरगी’ खाने के लिए सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी उठती हैं – सरगी में आमतौर पर उनकी सास द्वारा तैयार भोजन – ज्यादातर सेंवई, दूध और सूखे मेवे होते हैं। इस भोजन के बाद, वे चंद्रमा के प्रकट होने तक वे निर्जला उपवास रखती हैं।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है। यह हर साल कार्तिक महीने के चौथे दिन पड़ता है। इस साल करवा चौथ रविवार 24 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा। प्रचलित मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में, जब पुरुष व्यापार, यात्रा या युद्ध के कारण अपने घरों से कई बाहर महीनों तक बाहर रहते थे, तो जो महिलाएं पीछे रह जाती थीं, वे अपने पति के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना करती थीं, जिसमें अक्सर वे पूरा दिन निर्जला उपवास रखती थीं।
करवा चौथ पर महिलाएं जल्दी उठती हैं और ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करती हैं, उसके बाद, वे करवा माता, भगवान शिव, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय से प्रार्थना करते हैं और संकल्प (प्रतिज्ञा) लेती हैं कि व्रत का पालन अत्यंत भक्ति और ईमानदारी से करेंगी। करवा चौथ के दिन देर तक न सोएं क्योंकि व्रत की शुरुआत सूर्योदय के साथ ही हो जाती है। करवा चौथ के दिन यह व्रत करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए अन्यथा इसके अशुभ फल भुगतने पड़ सकते हैं। व्रती महिलाओं को करवाचौथ में भूलकर भी यह पांच काम करने से बचना चाहिए। आइये जानते हैं क्या हैं वो चार काम-
करवाचौथ के दिन किसी भी प्रकार कि नुकीली चीज़ों से दूर रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की कढ़ाई,सिलाई जैसे काम नहीं करने चाहिए। सुई धागे से तो बिलकुल दूर रहना चाहिए।
करवाचौथ सुहाग का त्यौहार हैं इसलिए इस दिन आप दान करना चाहें तो थोड़ा ध्यान रखें। करवाचौथ के दिन सफेद वस्तुओं जैसे सफेद कपड़े, दूध, चावल, दही और सफेद मिठाई आदि का दान न करें।
करवाचौथ सुहागिनों का त्यौहार है। इसलिए पूजा-पाठ के दौरान काले या भूरे रंग को शुभ नहीं माना जाता है। कोशिश करें कि इस दिन आप लाल रंग के वस्त्र ही धारण करें।इसके पीछे एक कारण यह भी है कि लाल रंग प्यार का प्रतीक माना जाता है।
करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। उन्हें की से भी किसी भी प्रकार के अपशब्द नहीं बोलने चाहिए और न ही किसी से किसी प्रकार का झगड़ा करना चाहिए। खासतौर से अपने पति से झगड़ा बिल्कुल नहीं करना चाहिए वरना व्रत का फल नहीं मिलेगा





