चीन में कहर बरपा रहे कोरोना के नए वैरियंट का पहला मरीज भारत के इस शहर में मिला,मचा हड़कंप

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भारत दिनांक 6 एप्रिल ( प्रतिनिधी)

भारत में कोरोना के तीसरी लहर लगभग समाप्ति की ओर है और महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल राज्यों ने 1 अप्रैल से मास्क मुक्त होने की घोषणा करते हुए नागरिकों को राहत दी

पड़ोसी देश चीन में कहर बरपाने वाले कोरोना संक्रमण के रोजाना रिकार्डतोड़ मामले सामने आ रहे हैं। इसके चलते चीन के कई शहरों के करोड़ों लोग लाकडाउन के घेरे में हैं। इसमें कोरोना के नए वैरिएंट से सबसे अधिक आबादी वाला शहर शंघाई बहुत अधिक प्रभावित है। इसके अलावा वुहान में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं और लगातार बढ़ते मामलों के बीच हालात काबू में आने का नाम नहीं ले रहे हैं।

इस बीच कोरोना के नए वैरिएंट XE और कप्पा के एक-एक केस देश का आर्थिक राजधानी मुंबई में मिले हैं, जिसने दिल्ली समेत अन्य राज्यों की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल, मुंबई की तरह दिल्ली में भी बड़ी संख्या में हवाई यात्रा के लिए विदेश से लोग आते हैं, ऐसे में मुंबई की तरह दिल्ली में भी कोरोना के नए वैरिंट XE और कप्पा के फैलने का खतरा बरकरार है।

इससे पहले अप्रैल-मई 2021 में डेल्टा और जनवरी-फरवरी, 2022 में ओमिक्रोन वैरिएंट ने सबसे ज्यादा दिल्ली और मुंबई के लोगों को प्रभावित किया था, जिसके चलते दोनों शहरों में स्कूल, कालेज बंद करने के साथ मिनी लाकडाउन लगा दिया था।

दिल्ली मेट्रो को भी पूरी तरह बंद करने के साथ दफ्तरों को बंद कर वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी गई थी। ऐसे में दिल्ली में अभी से सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि दिल्ली और मुबंई के बीच ट्रेन और हवाई सफर के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं।

ओमिक्रोन से भी 10 गुना घातक है XE वैरिएंट

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, शुरुआती जानकारी यह बताती है कि कोरोना का नया वैरिएंट XE और कप्पा दोनों ही विस्तार के मामले में ओमिक्रोन से 10 गुना अधिक घातक हैं। विदेश में इसे वैरिंएट के विस्तार को चौधी लहर नाम दिया गया है।

दरअसल, कोरोना के वैरिएंट XE को लेकर हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने जानकारी साझा करते हुए कहा है कि यह फैलाव के मामले में ओमिक्रोन से भी अधिक घातक है।

डब्ल्यूएचओ पहले भी कई बार कह चुका है कि कोरोना के वेरिएंट आपस में जुड़कर कुछ नए वेरिएंट बना रहे हैं। इसी कड़ी में ओमीक्रोन के दो सबवेरिएंट BA1 और BA2 का रीकाम्बिनेंट तैयार हुआ है और इसे ही XE कहा जा रहा है।

वहीं वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कोरोना वायरस के अन्य वेरिएंट के साथ जुड़कर बन रहे इस तरह के वेरिएंट बहुत ज्यादा घातक नहीं होते हैं और जल्दी ही निष्क्रिय हो जाते हैं।

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