भारतीय संस्कृति में आने वाले सभी पर्वो का अपना विशेष महत्व है. भारतीय संस्कृति मे विवाह संस्कार या पाणिग्रहण संस्कार का भी विशेष महत्व है. कुंडली और मुर्हूत देखने के बाद ही विवाह की तिथि तय क जाती है. दीपावली का पर्व समाप्त होने के बाद विवाह के मुर्हूत शुरु हो जाएंगे.
15 नवंबर से तुलसी विवाह के मुर्हूत शुरु हो जाएंगे, यह मुर्हूत कार्तिक पुर्णिमा तक जारी रहेगा. इसके बाद बाद से विवाह के मुर्हूत शुरु होंगे. नवंबर माह में 20, 21, 29 तथा 30 ये चार तिथियां विवाह मुर्हूत हैं, इसके बाद दिसंबर में विवाह मुर्हूत हैं. यानि नंवबर माह में होने वाले विवाह के लिए वर-वधु दोनों के परिवार वालों की ओर से खरीदारी दीपावली के तुरंत बाद शुरु हो जाएगी.
वर-वधु के कपड़े तथा आभूषण खरीदने का सिलसिला सोमवार से ओर तेज हो जाएगा. पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण बहुत से विवाह रद्द कर दिए गए थे, वे विवाह समारोह इस वर्ष होंगे. विवाह में आने वाले रिश्तेदारों को उपहार खरीदने भी शुरु हो जाएगा.






