शनि जयंती कल,जाने पूजा मुहूर्त,कैसे करे शनिदेव को प्रसन्न, कोनसे मंत्र का करे जाप

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भारत दिनांक 29 मई ( प्रतिनिधी)

सोमवार, 30 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर भगवान शनि का जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जाता है।

मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या पर ही न्याय और कर्म के देवता भगवान शनि का जन्म हुआ था। ज्येष्ठ अमावस्या पर शनिदेव की विशेष पूजा-आराधना और मंत्रों का जाप करके भगवान शनिदेव को प्रसन्न किया जाता है। ज्योतिष और धर्म के नजरिए से भगवान शनिदेव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।

भगवान शनिदेव व्यक्ति को कर्मों के अनुसार ही व्यक्ति को फल प्रदान करते हैं। शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि जयंती का दिन बहुत ही विशेष माना गया है। जिन जातकों के जीवन में अगर शनि संबंधी कोई दोष,साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप चल रहा है तो उनके लिए इस शनि जयंती पर पूजा आराधना करना विशेष लाभ देने वाला साबित होगा।

शनि जयंती पर शनि देव की पूजा-आराधना,दान-पुण्य और जप करने से सभी तरह का समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। इस वर्ष शनि जयंती पर दुर्लभ संयोग भी बना रहा है। आइए जानते हैं इस शनि जयंती पर बनने वाले विशेष संयोग, मुहूर्त,तिथि,पूजा विधि और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय।

इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर शनि जयंती का त्योहार काफी खास और महत्व है। दरअसल 30 वर्षों के बाद सोमवती अमावस्या और शनि जयंती एक साथ है। इसके अलावा इस दिन पर ही वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा।

जब अमावस्या की तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते है। सोमवती अमावस्या कृतिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के योग में शनि जन्मोत्सव का पर्व मनाना काफी खास है। ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती शनिदेव के स्वयं की राशि कुंभ में रहते ही है ऐसे में शनि जयंती का महत्व और भी अधिक हो जाता है।

 

शनि जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त

सोमवार, 30 मई को उदय तिथि के कारण इस बार शनि जयंती मनाई जाएगी।

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का आरंभ- 29 मई को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की समाप्ति- 30 मई को शाम 4 बजकर 58 मिनट पर

शनि भगवान की विशेष कृपा और सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा-उपासना का विशेष महत्व होता है। शनि जयंती के मौके पर सुबह-सुबह अपने घर के आसपास स्थिति किसी शनि मंदिर जाकर भगवान शनिदेव की प्रतिमा को प्रणाम करते हुए सरसों के तेल से अभिषेक करें। शनिदेव को काले तिल, उड़द की दाल,नीले फूल और नीले वस्त्र अर्पित करते हुए तेल का दीपक जलाएं और ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जप करते रहें। इसके बाद शनिदेव की आरती करे और अंत में जरूरतमंदों को चीजों का दान करें।

शनि जयंती पर ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनि जयंती के मौके पर पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित मीठा जल चढ़ाने व तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। शनि की साढ़ेसाती या ढय्या के चलते पीपल के पेड़ की पूजा करना और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। वहीं सुख-शांति में वृद्धि के लिए इस दिन पीपल का वृक्ष रोपना बहुत अच्छा माना गया है।

शनिदेव के दिव्य मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का इस दिन जप करने से प्राणी भयमुक्त रहता है।

शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। शनि दोष की शांति के इस दिन शनिदेव की पूजा के साथ-साथ शिवजी पर काले तिल मिले हुए जल से ‘ॐ नमः शिवाय’का उच्चारण करते हुए अभिषेक करना चाहिए।

शनिदेव की प्रसन्नता के लिए जातक को शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए एवं गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए,ऐसा करने से जीवन में आए संकट दूर होने लगते हैं।

शनिदेव,हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव प्रसन्न रहते हैं,इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।

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