अकोला: वनी, रंभापुर और बाबुलगाँव में निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजनाओं का आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया अवलोकन

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अकोला दिनांक 28 मई ( प्रतिनिधी)

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला के परिसर में वनी, रंभापुर और बाबुलगाँव में निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजनाओं का आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी  ने कुलपति  विलास भाले  की उपस्थिति में अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित देशभर में जलसंरक्षण और जलाशयों की तस्वीर बदलकर रख देने वाले ‘अमृत सरोवर अभियान’ के तहत 15 अगस्त 2023 तक पूरे देश में लगभग 50,000 अमृत सरोवरों का कायाकल्प और विकास करने का निर्णय लिया गया है। इस संदर्भ में प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का कायाकल्प किया जाएगा।

महाराष्ट्र में बुलढाणा पॅटर्न के यशस्वी प्रयोग के बाद अमृत सरोवर अभियान में 2022 तक 500 से अधिक जल निकायों, 270 फार्म पॉन्ड्स का कायाकल्प किया जा चुका है। जिसके नतीजे राज्य में 34,000 टीसीएम की अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का निर्माण बिना किसी लागत से हुआ है।

अमृत सरोवर की इसी शृंखला में महत्वाकांक्षी अकोला जिले में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला और महाराष्ट्र पशुपालन और मत्स्य पालन विश्वविद्यालय, नागपुर के बोरगांव के परिसरों में 2468 टीसीएम की जल भंडारण क्षमता वाले 34 जलाशयों का निर्माण हो रहा है।

जल संरक्षण के यशस्वी पायलट प्रोजेक्ट बुलढाणा पॅटर्न पर आधारित इस मॉडल में अमरावती-अकोला राष्ट्रीय राजमार्ग 53 से संबंधित राजमार्गो के सुधार के काम के जरिए बिना किसी लागत से जलाशयों को गहरा करने और उनका कायाकल्प करने का काम किया जा रहा है।

इन जलाशयों से निकाली गई मिट्टी, गाल और अन्य चीजों का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग काम के लिए किया जा रहा है। इस मॉडल योजना के माध्यम से पीकेवी और माफसू परिसरों में 34 तालाबों/झीलों के निर्माण की योजना है जिसमें 2468 टीसीएम जल संचय बनाने का प्रस्ताव है। इनमें से 20 झीलों का निर्माण पूरा हो चुका है और 9 झीलों का निर्माण कार्य चल रहा है जबकि 5 झीलों को जल्द ही शुरू किया जाएगा.

पूरी तरह तैयार 20 जलाशयों को आज अमृत सरोवर अभियान का हिस्सा घोषित किया गया है। इन 20 जलाशयों की जल भंडारण क्षमता 1276 टीसीएम है। शुरुआत में यहाँ सिंचाई क्षमता 150 हेक्टर थी, लेकिन इन जलाशयों के बनने के बाद ये 663 हेक्टर की हो गई है। प्रस्तावित 34 जलाशयों के निर्माण के बाद ये सिंचाई क्षमता बढ़कर 2468 हेक्टर हो जाएगी। परिसर में पहले केवल एक खरीप फसल ली जाती थी, यह प्रकल्प के बाद अब एक से ज्यादा फसलें ली जा सकेगी।

पशुपालन विकास क्षेत्र में 16 एकड़ में एक तालाब का निर्माण किया गया है और उसमें 300 टीसीएम पानी बनाया गया है. इतनी बड़ी झील के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत इस परियोजना से कम हुई है और इस झील का निर्माण नि:शुल्क किया गया है. इससे पहले विश्वविद्यालय परिसर में पानी की किल्लत की बड़ी समस्या थी. पुरानी योजनाओं के विफल होने से कुछ ही क्षेत्रों में सिंचाई हो सकी है। इन 34 नियोजित झीलों के पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय का पूरा क्षेत्र सिंचाई के दायरे में आ जाएगा।

इस मॉडल से मत्स्यपालन के लिए तैयार किए गए तालाबों का उपयोग मछली पकड़ने के लिए किया जा सकता है। इनकी नीलामी कर इससे राजस्व प्राप्त करना संभव होगा। इससे रोजगार भी निर्माण होंगे। पिछले साल पंजाबराव देशमुख यूनिवर्सिटी ने ऐसी दो झीलों की नीलामी कर 8 लाख रुपये की कमाई की थी. इस मॉडल से वॉटर रिचार्ज के जरिए 1 लाख की कुल आबादी वाले 18 गावों को लाभ होगा।

अमृत सरोवर के इस मॉडल का उपयोग देश के सभी सूखा प्रभावित क्षेत्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में किया जाना चाहिए। इससे देशभर के कुल 71 कृषि विश्वविद्यालय लाभान्वित हो सकते हैं। राज्य और देश भर के सभी मंत्री पंजाबराव देशमुख विश्वविद्यालय की इन अमृत सरोवर परियोजनाओं का दौरा करें और अपने क्षेत्र में ऐसी परियोजनाओं को बनाने का प्रयास करें यह मै आव्हान करता हूं।

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