कल चतुर्थी और पंचमी एक ही दिन आने से आज माता की छठ मनाई जा रही है, आज देवी कात्यानी का पूजन किया जाता है विवाह में आ रही सभी परेशानियां दूर करने के लिए आज के पूजन का विशेष महत्व है
आज नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा की छठी शक्ति देवी कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। इनका स्वरूप चमकीला और तेजमय है। इनकी चार भुजाएं हैं।
देवी कात्यायनी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने मां भगवती जगदंबा की कठिन उपासना की और उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त करने का आग्रह किया। मां भगवती ने इच्छा पूरी करते हुए उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।
कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने और सर्वप्रथम उनके द्वारा पूजे जाने के कारण यह देवी कात्यायनी कहलाईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं, ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं क्योंकि भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
इस दिन प्रातः काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर मां का गंगाजल से आचमन करें।
अब देवी कात्यायनी का ध्यान करते हुए उनके समक्ष धूप दीप प्रज्ज्वलित करें।
रोली से मां का तिलक करें अक्षत अर्पित कर पूजन करें।
मां कात्यायानी को गुड़हल या लाल रंग का फूल चढ़ाना चाहिए।
मां कात्यायनी की आरती करें और पूजा के अंत में क्षमायाचना करें।
देवी भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती, कवच और दुर्गा चलीसा आदि का पाठ करना चाहिए।
पूजा करते समय मां कात्यायनी के मंत्र का जाप भी करना चाहिए।
पूजा मंत्र- ॐ देवी कात्यायन्यै नमः





