नागपुर स्थानीय स्वराज संस्था के विधानपरिषद चुनाव की घोषणा होते ही शहर और जिले में राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। 10 दिसंबर 2021 को होने वाले विधानपरिषद चुनाव की घोषणा होते ही जिला निर्वाचन प्रशासन ने पालकमंत्री, महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति, जिप अध्यक्ष सहित सभी पदसिद्ध पदाधिकारियों को सरकारी वाहन कार्यालय में जमा करने के निर्देश जारी किए।
इस संबंध में उन्हें शाम को ही पत्र जारी किया गया। जिसके बाद सभी पदाधिकारियों ने अपने-अपने वाहन जमा करा दिए। साथ ही चुनावी हलचलें भी बढ़ गई हैं। फिलहाल आचार संहिता लगते ही नई घोषणा और नए कामों पर रोक लग गई है। पदाधिकारी न निर्देश दे सकते हैं और न कोई फाइल मंजूर करवा सकते हैं। जिसका असर शहर के विकास कार्यों पर होने की संभावना है।
नए कामों पर संकट
विधानपरिषद चुनाव के बाद आगामी जनवरी में नागपुर महानगरपालिका चुनाव के लिए आचार संहिता लगने की चर्चा है। ऐसे में शहर के नए कामों पर एक तरह से ब्रेक लगने का संकट है। फिलहाल चुनाव आचार संहिता के कारण पदाधिकारी कोई भी काम करवा नहीं सकेंगे।
हालांकि चर्चा अब नए विधानपरिषद सदस्य को लेकर है। निवर्तमान विधानपरिषद सदस्य गिरीश व्यास की जगह कौन चेहरा होगा? इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आंकड़ों के लिहाज से चुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी है। लेकिन हाल के चुनाव में जिला परिषद और पंचायत समिति में कांग्रेस के सदस्य बढ़े हैं। ऐसे में भाजपा की चुनौतियां बढ़ गई हैं। किसी बड़े उलटफेर से इनकार भी नहीं किया जा रहा है। स्नातक चुनाव में इस उलटफेर को देखा जा चुका है। भाजपा को अति-आत्मविश्वास भारी पड़ा। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों उम्मीदवार चयन और रणनीतियां बनाने को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं।






