इतवारी में 20 लाख लूट मामले में बड़ा खुलासा,8 गिरफ्तार

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इतवारी के अनाज बाजार परिसर में हुई लूट का पर्दाफाश करने में क्राइम ब्रांच की यूनिट 3 को सफलता मिली. वारदात को अंजाम देने वाले 8 आरोपियों में से 3 कॉलेज छात्र हैं. पैसों की लालच में तीनों लुटेरे बन गए. अपराधियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया. अब सभी लॉकअप की हवा खा रहे हैं.

पकड़े गए आरोपियों में मस्कासाथ निवासी आर्यन महेंद्र पडोले (19), तांडापेठ निवासी कुणाल चंद्रभान बोकड़े (19), न्यू सोमवारीपेठ निवासी आदित्य दीपक कोटीवान (20), बेलेनगर, कलमना निवासी प्रणय अशोक लांजेवार (22), रामनगर, बारीपुरा निवासी अथर्व विलासराव अक्सर (21), बड़ा ताजबाग निवासी समीर अमहद उर्फ सोनू नूर मोहम्मद (22), वकीलपेठ निवासी पीयूष दीपक धारगावे (20) और राउत चौक, लालगंज निवासी अथर्व विजय डाहे (18) का समावेश है. उनका साथी तांडापेठ निवासी मन्य भूते पुलिस के हाथ नहीं लगा.

अपराधियों की ली मदद

अथर्व, कुणाल और आर्यन दोस्त हैं और बीकॉम सेकंड ईयर में पढ़ते हैं. अथर्व पढ़ाई के साथ-साथ एक व्यापारी की दूकान में भी काम करता है. तीनों को खुद का व्यवसाय शुरू करना था लेकिन इसके लिए पैसे नहीं थे. अथर्व का अक्सर काम से इतवारी जाना होता था. इसी दौरान उसे कमल प्रजापति के यहां काम करने वाला पार्थ चावड़ा मोटी रकम भुतड़ा चेंबर स्थित लॉकर में ले जाते दिखाई दिया.

लालच बढ़ गई और तीनों ने लूट का प्लान बनाया लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाए. इसीलिए मन्या की मदद ली गई. मन्या ने अपने अन्य साथियों को प्लान में शामिल किया. पिछले 8 दिनों से आरोपी पार्थ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और मंगलवार की रात वारदात को अंजाम दिया.

एड़ी-चोटी का जोर लगाया 

सीपी अमितेश कुमार ने प्रकरण को गंभीरता से लिया और डीसीपी क्राइम चिन्मय पंडित को आरोपियों को ढूंढ निकालने के निर्देश दिए. क्राइम ब्रांच यूनिट 3 की टीम ने परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. कुछ लोगों ने अथर्व की पहचान कर दी. अथर्व के साथ पुलिस ने अन्य 7 आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. आगे की जांच के लिए उन्हें लकड़गंज पुलिस के हवाले कर दिया गया.

पुलिस ने 13.99 लाख रुपये नकद और 3 दोपहिया वाहन जब्त किए. समीर और आदित्य हत्या के मामले में आरोपी हैं. दोनों जमानत पर जेल से बाहर आए थे. उन्हें भी कोर्ट की कार्यवाही के लिए रुपयों की जरूरत थी. प्लानिंग में समीर की मुख्य भूमिका थी. रुपयों की हिस्से बांटी की जिम्मेदारी भी उसी पर थी.

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