बिल्डर के साथ 18 करोड़ की धोखाधड़ी

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नागपुर दिनांक 1 मई ( महानगर प्रतिनिधी)

एक बिल्डर के साथ जमीन बिक्री के नाम पर 18.22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है।

आरोपियों के नाम स्वामी अपार्टमेंट, रामदासपेठ निवासी कमलेश चंद्रशेखर दाढ़े (60), नारायण चंदीराम डेमले (72), उसका बेटा अतुल नारायण डेमले (45) फ्रेंड्स एनक्लेव, सिविल लाइंस नागपुर, गौरीशंकर जगमल सच्चानी (54) जरीपटका नागपुर और विजय कीमतराय रमानी (62) शिवाजीनगर निवासी है।

न्यायालय के आदेश पर न्यू कालोनी, सदर निवासी नावेद साजिद अली (51) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। आरोपियों पर धारा 420, 406, 409, 407, 413, 416, 425, 500,506,120ब, 34 के तहत मामला दर्ज किया है। नारायण डेमले और विजय रमानी चार्टर्ड अकाउंटेंट है, जबकि अन्य 3 आरोपी बिल्डर हैं।

यह है पूरा मामला :

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिल्डर नावेद साजिद अली का बिल्डर का कारोबार है। वह अपने साझेदार प्रशांत वसाडे के साथ मिलकर यह कारोबार करते हैं। नावेद और प्रशांत ने पाॅर्थ 5 साॅफ्टवेयर टेक्नाेलाॅजी पार्क लिंक रोड, सदर में आरोपियों से 18.89 एकड़ जमीन का सौदा वर्ष 2006 से 2008 के दरमियान किया।

जमीन खरीदी का सौदा 18.22 करोड़ रुपए में हुआ। आरोपियों ने रुपए लेने के बाद सौदे में उल्लेखित जमीन के कुछ हिस्से की रजिस्ट्री करके दी, बाकी बची जमीन की रजिस्ट्री करने में टालमटोल करते रहे। कई बार नावेद और प्रशांत ने आरोपियों से रजिस्ट्री करने की बात की।

आरोपियों ने दोनों साझेदार बिल्डर नावेद और प्रशांत से जमीन का सौदा करते समय वादा किया था कि वे जमीन का एनए भी करवाकर देंगे, लेकिन जमीन का एनए नहीं कराया। इसीलिए नावेद ने मामले की शिकायत पुलिस के पास की। उस समय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इस दौरान वर्ष 2017 में भू-माफियाओं के खिलाफ गठित की गई एसआईटी के पास नावेद और प्रशांत ने गुहार लगाई। एसआईटी को इस प्रकरण की जांच सौंपी गई। एसआईटी के अधिकारी ने लिखित समझौता करा दिया। इस समझौते में भी आरोपियों ने बाकी जमीन की रजिस्ट्री कराने और एनए कराकर देने का वादा किया था। समझौता होने के कारण एफआईआर नहीं हुई।

बाद में आरोपी समझौते के अनुसार काम करके देने से मुकर गए। नावेद ने दोबारा इस बात की शिकायत पुलिस से की। मामला आर्थिक अपराध शाखा के पास पहुंचा तो इसे दीवानी स्वरूप का मामला बताते हुए नावेद और प्रशांत को न्यायालय में जाने की सलाह दी गई।

अंत में नावेद ने आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए न्यायालय में अर्जी दी। न्यायालय के आदेश के बाद सदर पुलिस ने आरोपियों पर विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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