वोक्हार्ट के डॉक्टरों ने सर्जरी के बजाय एंडोस्कोपिक प्रक्रिया कर बचाई 24 वर्षीय युवक की जान

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नागपुर दिनांक 23 मार्च (प्रतिनिधी )

अत्यधिक कुशल और जटिल प्रक्रिया के दौरान नागपुर के वोक्हार्ट अस्पताल में एक 24 वर्षीय मरीज की जान बचाई गई। एक सड़क हादसे के बाद, मरीज की भोजन नली (एसोफैगस) टूट गई थी, चेहरे की हड्डियों और खोपड़ी में भी फ्रैक्चर हो गया था।

डॉ. पीयूष मारूडवार, कंसल्टेंट- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, जो मुख्य रूप से मरीज का इलाज कर रहे थे, ने टूटी हुई भोजन नली को ठीक किया। डॉ. राहुल झामड, सलाहकार- न्यूरो सर्जरी, ने संबंधित मरीज की क्षतिग्रस्त खोपड़ी की हड्डी का ऑपरेशन किया और डॉ. परीक्षित जनाई, सलाहकार- प्लास्टिक सर्जरी ने मरीज के क्षतिग्रस्त चेहरे की हड्डियों को ठीक किया।

जबलपुर के रहने वाले मरीज को वोक्हार्ट अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार देकर उसे पहले स्थिर किया गया। जब मरीज को वोक्हार्ट के इमरजेंसी रूम में ले जाया गया तो वह पूरी तरह से होश में नहीं था, उसका ऑक्सीजन लेवल भी कम था।

संबंधित मरीज के नाक से खून बह रहा था, कन्वल्शन और उल्टी के साथ सिर में चोट भी लगी थी। भोजन नली फटने के कारण उसके सीने की गुहा (चेस्ट कैविटी ) में हवा और तरल पदार्थ रिसने लगा था, जो आगे चलकर संक्रमित हो गया। उन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य सहायक देखभाल शुरू की गई और उन्हें डॉ. पीयूष मारूडवार के अधीन भर्ती कराया गया था।

उसी सुबह डॉ. मारूडवार ने यूजीआई एंडोस्कोपी और एसोफैगस में वेध (परफोरेशन) के स्थान को जीवन रक्षक, अग्रिम प्रक्रिया और नवीनतम तकनीक, जिसे स्कोप क्लिपिंग पर फुल थिकनेस कहा जाता है, का उपयोग करके वेध को सील कर दिया।

यह मामला अधिक चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अन्नप्रणाली में वेध का ये स्थान बहुत ऊपर था। इस नवीनतम एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करके बड़ी सर्जरी को टाला गया। अगले दिन सीटी स्कैन से यह साफ़ हो गया कि वेध की जगह को पूरी तरह से सील कर दिया गया है, इसलिए मरीज को जरुरी मौखिक आहार भी शुरू कर दिया गया।

24 साल के इस युवक के चेहरे को विकृति से बचाने के लिए, डॉ परीक्षित जनाई द्वारा ट्रिकी फेशियल बोन फ्रैक्चर सर्जरी की गई। डॉ. राहुल ने अभिनव एंडोस्कोपिक खोपड़ी बेस की मरम्मत का उपयोग करके खोपड़ी के बेस को दुरुस्त किया। मरीज को मेनिनजाइटिस (ब्रेन कवरिंग का इन्फेक्शन) भी था।

डॉ. वैभव अग्रवाल, जो सलाहकार चिकित्सक और इन्टेन्सिवज हैं, की मदद से एपिड्यूरल और इंट्रा वेनस एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करके मेनिनजाइटिस का इलाज किया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दुनिया भर के अच्छे केंद्रों में इस प्रकार के मेनिनजाइटिस के साथ जीवित रहने की दर केवल 20-30% है।

यह मरीज डॉक्टरों की इन सभी कोशिशों से ठीक हो गया और उसे अस्पताल से सफलतापूर्वक छुट्टी दे दी गई है।

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