केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने स्कूली दिनों का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि शिक्षकों की पिटाई के चलते उनके अंदर भाषण देने का हौसला पैदा हुआ। नतीजतन उन्होंने भाषण देना सीखा।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि स्कूल के दिनों में वह काफी नटखट हुआ करते थे। इसके चलते गडकरी और उनके कुछ सहपाठी शरारती बच्चों के नाम से जाने जाते थे।
गडकरी ने बताया कि उनकी कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अंग्रेजी में भाषण दिया, लेकिन भाषण में उस छात्रा ने गलती से अंग्रेजी भाषा के ‘नेचर’ शब्द को ‘नटूरे’ कह दिया। इसके बाद गडकरी और उनके सहपाठियों ने उस छात्रा की खूब खिल्ली उड़ाई। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद प्रधानाचार्या ने गडकरी और उनके साथियों को अपने कक्ष में बुलाकर खूब पिटाई की। प्रधानाचार्या ने पूछा, “उस छात्रा में भाषण देने का साहस है, क्या गडकरी और उनके साथी कभी ऐसा कर पाएंगे..?”
गडकरी ने बताया कि उस दिन प्रधानाचार्या से मिली मार और नसीहत ने उनके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा पैदा किया। इसके बाद गडकरी ने उस दिन से भाषण की तैयारी शुरू की। गडकरी ने कहा कि वह शुरूआती दिनों में श्रोताओं को मूर्ख समझ कर भाषण दिया करते थे। गडकरी के अनुसार प्रधानाचार्या की मार और नसीहत की वजह से विद्यार्थी जीवन में वे अच्छे वक्ता के रूप में पहचान बना पाए।






