नागपुर दिनांक 5 जून ( महानगर प्रतिनिधी )
फर्जी सॉल्वेंसी और दस्तावेजों के बल पर अपराधियों को जमानत दिलाने वाले एक गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया. पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया. तीनों फिलहाल पुलिस हिरासत में है. सूत्रों की मानें तो न्याय व्यवस्था को क्षति पहुंचाने में केवल दलाल ही नहीं, बल्कि कोर्ट के बाबू और वकीलों का भी हाथ है.
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि इस फर्जीवाड़े की जानकारी वकील और कोर्ट के लिपिकों को भी थी. इसके बावजूद आरोपियों को बेल मिल जाती थी. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि जिन पर न्याय व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी है वे लोग ही थाली में छेद कर रहे थे. पकड़े गए आरोपी में देशपांडे लेआउट, वर्धमाननगर निवासी सुनील मनोहर सोनकुसरे (45) और सतीश रामकुमार शाहू (32), रवि सावरकर को न्यायालय ने 7 जून तक पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए.
एक अधिकारी ने बताया कि रवि के जेराक्स सेंटर और घर की तलाशी में बड़े पैमाने पर राशन कार्ड के दस्तावेज मिले हैं. उसका काम राशन कार्ड के दस्तावेज तैयार करना था. वह देशपांडे लेआउट परिसर में जेराक्स सेंटर चलाता है. कुछ वर्ष पहले सुनील ने महल के परिमंडल कार्यालय से राशनिंग विभाग का स्टैंप चोरी किया था. सभी राशन कार्ड पर वही स्टैंप लगाया जाता था. पुलिस को सुनील और सतीश के मोबाइल की जांच में कई अहम सुराग मिले.
सुनील का कहना है कि कई वकीलों ने उसके जरिए ही सॉल्वेंसी बनाकर अपने पक्षकार को जमानत दिलवाई. एक ही इंसान को अलग-अलग न्यायालयों में खड़े करके फर्जी सॉल्वेंसी के जरिए बेल दिलाई जाती थी. करीब 20 वकीलों के नाम उसने पुलिस को बताए है. केवल वकील ही नहीं जिला व सत्र न्यायालय में काम करने वाले बाबू भी उसके संपर्क में थे. वे लोग जानते थे कि सॉल्वेंसी फर्जी तरीके से बनाई गई है.
बावजूद सब आंख मूंदकर काम कर लेते थे. इसका कारण कोई भी समझ सकता है. पुलिस अब सुनील के जरिए सॉल्वेंसी लेने वाले वकील और बेल दिलाने में मदद करने वाले क्लर्क की सूची बना रही है. खुद उनपर एक्शन लेने की बजाए जिला विधि सेवा प्राधिकरण को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जाएगा.






