नागपूर दिनांक 18 नवंबर(प्रतिनिधि)
विदर्भ के जंगलों से बाघों के स्थानांतरण पर फिलहाल ब्रेक लग गई है। यह ब्रेक एनटीसीए की ओर से लगी है। वन विभाग की ओर से विदर्भ में बाघों की संख्या बढ़ने से इनमें से 50 के करीब बाघों को ऐसी जगह शिफ्ट करने की तैयारी थी, जहां बाघों की संख्या कम है।
इसके लिए एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) से वन विभाग ने मंजूरी मांगी थी। लेकिन लगातार वन्यजीव प्रेमियों की ओर से हो रहे विरोध व वन्यजीवों की स्थानांतरण में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी गई है।
विदर्भ में करीब 200 बाघ
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की ओर से 2018 की रिपोर्ट को पेश की गई थी, जिसमें महाराष्ट्र में कुल 314 बाघों के होने का जिक्र है। हालांकि इसमें सबसे ज्यादा बाघ विदर्भ में ही मौजूद है। 2 सौ के करीब बाघ विदर्भ के जंगलों में हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या चंद्रपुर क्षेत्र में है। परिणामस्वरूप मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति अक्सर उत्पन्न हो रही है। कई बार इंसानों की जान भी गई है।
मांग होते ही विरोध
वन विभाग का मानना है कि बाघों की आबादी पर लगाम नहीं कसी गई तो भविष्य में स्थिति काफी विकट हो सकती है। ऐसे में वर्ष 2019 में राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक में 50 के करीब बाघों को ऐसी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा गया था, जहां बाघों की संख्या कम है।
एनटीसीए के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पेंच, ताड़ोबा, नवेगांव-नागझिरा, मेलघाट आदि जगहों पर बाघों की संख्या क्षेत्र के अनुसार ठीक है। लेकिन पश्चिम महाराष्ट्र में सह्याद्रि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में केवल 3 बाघ ही मौजूद हैं। ऐसे में इन बाघों को वहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव था, लेकिन मांग सामने आते ही कई वन्यजीव प्रेमियों ने विरोध किया।






