ईडी के आदेश, एम्प्रेस मॉल के शोरूम संचालक मैनेजमेंट से नहीं कर सकेंगे आर्थिक व्यवहार

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नागपूर दिनांक 12 नोव्हेंबर (विशेष प्रतिनिधी)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बुधवार को एम्प्रेस मॉल को कब्जे में लेने के बाद मॉल के सभी शोरूम्स को एम्प्रेस मॉल के मैनेजमेंट से किसी भी प्रकार का आर्थिक व्यवहार नहीं करने के आदेश जारी किए जा रहे हैं।

कोलकाता से आई अधिकारियों की टीम गुरुवार को भी गांधीसागर तालाब स्थित एम्प्रेस मॉल में डटी रही। ईडी की ओर से मॉल के सभी शोरूम्स को दिए जा रहे नोटिस में कहा जा रहा है कि दुकानों का किराया, बिजली बिल आदि खर्च ईडी के खाते में जमा किया जाएगा। एम्प्रेस मॉल के मैनेजमेंट कार्यालय में किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है। मॉल के प्रवेश द्वारा पर ईडी के 8 से 10 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। कार्रवाई को लेकर सभी चुप्पी साधे हुए हैं।

आदेश के उल्लंघन का आरोप

इस मामले में एनसीएलएटी ने ईडी को नोटिस जारी कर 6 दिसंबर तक जवाब मांगा था। तब तक इस मामले में स्थगनादेश जारी किया गया था। इस मामले में एम्प्रेस मॉल प्रबंधन ने बताया कि ईडी को 8 दिन पहले ही रिजोल्युशन की प्रति दे दी गई थी। बता दें कि बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एम्प्रेस मॉल को अपने कब्जे में ले लिया। यह कार्रवाई 725 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में की जा रही है। यह प्रॉपर्टी लगभग 500 करोड़ रुपए कीमत की है।

कार्रवाई गलत : मॉल प्रबंधन

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शहर के एम्प्रेस मॉल को अटैच किए जाने के बाद मॉल प्रबंधन के.एस.एल. एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने भी अपना पक्ष रखा है। कंपनी का दावा है कि मॉल और ईडी के बीच का विवाद राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की दिल्ली स्थित मुख्य खंडपीठ में विचाराधीन है। इस मामले में 25 अक्टूबर को एनसीएलएटी के आदेश के बावजूद ईडी ने 10 नवंबर को मॉल को अपने कब्जे में ले लिया, ऐसा करके उन्होंने न्यायाधिकरण के आदेश का उल्लंघन किया है।

मनी लांड्रिंग का मामला : ईडी

ईडी के अनुसार तायल ग्रुप ऑफ कंपनीज की तीन अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो, बीएस एंड एफसी, मुंबई की तीन प्राथमिकी के आधार पर मनी लांड्रिंग जांच शुरू की। मे. एक्टिफ कॉर्पोरेशन लि., मे. जयभारत टेक्सटाइल्स एंड रियल एस्टेट लिमिटेड और मे. केकेटीएल/मे. एसके निट (इंडिया) लि. पर धोखाधड़ी और वर्ष 2008 के दौरान बैंक ऑफ इंडिया और आंध्रा बैंक, मुंबई से धोखे से 524 करोड़ रुपए की राशि का ऋण लेने का आरोप है। पीएमएलए, 2002 की धारा 44/45 के तहत एक अभियोजन शिकायत पीएमएलए, मुंबई में विशेष अदालत के समक्ष दायर की गई। अदालत ने 22 जनवरी 2021 को मनी लॉन्ड्रिंग अपराध का संज्ञान लिया था। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

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