नागपुर दिनांक 17 दिसंबर( शहर प्रतिनिधी)
मनपा में उजागर हुए स्टेशनरी घोटाला में भले ही अधिकारियों को बचाने की कवायद चल रही हो किंतु एक अधिकारी द्वारा की गई शिकायत के बाद पुलिस महकमा हरकत में आ गया है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने न केवल एफआईआर दर्ज की, बल्कि आरोपियों को गिरफ्तार करने का सिलसिला भी शुरू कर दिया. हालांकि 4 आरोपियों में से केवल एक न्यू नंदनवन निवासी अतुल साकोरे को ही गिरफ्तार किया जा सका लेकिन पुलिस सभी को गिरफ्त में लेने जुट गई है.
मनपा की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार पुलिस ने जयप्रकाशनगर, प्रीति हाउसिंग सोसाइटी निवासी कोलबा साकोरे, सुषमा साकोरे और महल स्थित दक्षिणामूर्ति चौक निवासी मनोहर साकोरे के खिलाफ मामला दर्ज किया है. सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए न केवल उनके निवास, बल्कि कई जगह पर छापेमारी भी की किंतु 3 आरोपी हाथ नहीं लगे. इन आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है.
फंस सकती हैं कई बड़ी मछलियां
सूत्रों के अनुसार मनपा में स्टेशनरी सप्लाई के लिए 5 एजेंसियों के साथ रेट कान्ट्रैक्ट किया गया है. विशेषत: पांचों एजेंसियां एक ही परिवार के सदस्यों की हैं जिनमें मुख्य रूप से पद्माकर उर्फ कोलबा साकोरे ही मनपा के साथ लेन-देन किया करता था. अलग-अलग विभागों में आवश्यकता अनुसार पूरे वर्षभर स्टेशनरी सप्लाई होती थी. कोरोना काल में 7 अक्टूबर 2020 से लेकर 31 जुलाई 2021 के बीच स्टेशनरी सप्लाई नहीं किए जाने के बावजूद बोगस हस्ताक्षर कर 67 लाख का बिल प्राप्त किया गया. यहां तक कि इसके लिए 41 फाइल्स तैयार की गईं. मनपा के स्वास्थ्य विभाग में स्टेशनरी सप्लाई को लेकर इन फाइलों को तैयार किया गया था.
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत प्रशांत भातकुलकर को वित्त विभाग के प्रिवेंशन लेजर अकाउंट में धांधली दिखाई देने पर उसने स्वास्थ्य अधिकारी संजय चिलकर को इसकी जानकारी दी. इसके बाद पूरा घोटाला उजागर हुआ. सूत्रों के अनुसार वर्तमान में भले ही एजेंसी के मालिकों की धरपकड़ जारी हो किंतु पीसीआर में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है. इसके अनुसार बड़ी मछलियों के फंसने की भी संभावना जताई जा रही है.
अधिकारी सकते में
सूत्रों के अनुसार अब पुलिस के पास मामला चले जाने के कारण मनपा के कई अधिकारी भी सकते में हैं. माना जा रहा है कि भले ही स्टेशनरी सप्लाई के बोगस हस्ताक्षर तैयार कर बिल तैयार किया गया हो, किंतु कम्प्यूटरीकृत और फाइलों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जब तक विभागों से छानबीन नहीं होती तब तक किसी का भी बिल नहीं निकाला जाता है. पुख्ता प्रक्रिया होने के बावजूद बिना छानबीन बिल कैसे निकाला गया? एजेंसी को 67 लाख का चेक कैसे दिया गया? इसे लेकर मुख्य वित्त व लेखा अधिकारी विजय कोल्हे और विभाग के अन्य लोगों पर भी गहरा संदेह जताया जा रहा है. पुलिस की छानबीन में इसी तरह के कई खुलासे होने की जानकारी सूत्रों ने दी.






