पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) नेताओं का अपने ट्विटर हैंडल पर तिरंगे की डीपी न लगाने पर तूफान खड़ा हो गया था। लेकिन इस विवाद के बाद संघ के कई पदाधिकारियों ने अपनी डीपी पर तिरंगा लगा लिया
सहकार्यवाह अरूण कुमार, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, प्रज्ञा प्रमुख पदाधिकारी नंद कुमार सहित कई अन्य संघ नेताओं ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर तिरंगे की डीपी लगा ली है। लेकिन संघ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अभी भी तिरंगा नहीं लगाया गया है।
इसके साथ ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के ट्विटर हैंडल पर भी तिरंगे की डीपी नहीं लगाई गई है।
संघ के ट्विटर हैंडल पर कवर फोटो के रूप में स्वयं सेवकों के दीक्षा समारोह की एक फोटो लगी है, तो डीपी पर अंग्रेजी के अक्षरों में आरएसएस (RSS) लिखा होने के साथ भगवा ध्वज लहरा रहा है। इसे आरएसएस के लोगो की तरह देखा जाता है। संघ का तिरंगे को लेकर विवाद क्या है और इस विवाद की सच्चाई क्या है?
कैसे उठा विवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तिरंगे की डीपी लगाने की अपील की थी। उन्होंने स्वयं 2 अगस्त को अपने ट्विटर एकाउंट पर तिरंगे की डीपी लगाई थी।
इसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित सभी भाजपा नेताओं ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तिरंगे की डीपी लगाकर 13 अगस्त से 15 अगस्त तक चलने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रचार को मजबूती दी।
लेकिन इसके बाद भी भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर तिरंगे की डीपी नहीं लगाई जिससे विवाद खड़ा हो गया।






