मध्य भारत में पहली बार- वोक्हार्ट हॉस्पिटल में एक मरीज में इस्तेमाल किए गए 3 ड्रग एल्यूटिंग बैलून

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नागपूर दिनांक 26 जुलाई ( महानगर प्रतिनिधी)

वोक्हार्ट हॉस्पिटल,नागपुर के लिए अपनी तरह के पहले मामले में डॉ. नितिन तिवारी, वरिष्ठ सलाहकार- इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी ने मध्य भारत में पहली बार एक केस का प्रदर्शन किया है । डॉ निर्मल जयस्वाल ने मरीज को अनियंत्रित मधुमेह और सांस फूलने की तकलीफ को देखते हुए उन्हें एंजियोग्राफी का सुझाव दिया था और इसलिए मरीज को डॉ नितिन तिवारी के पास रेफर कर दिया।

डॉ. तिवारी ने मध्य भारत में पहली बार एकल रोगी पर तीन ड्रग एल्यूटिंग बलून्स का प्रयोग किया । 57 वर्ष के पुरुष रोगी को विसरित ट्रिपल वेसल रोग होने का पता चला और उन्हें मधुमेह भी था जिसने इस मामले को और भी जटिल बना दिया ।

तीनों धमनियों में कई रुकावटें थीं और दुर्भाग्य से वेसल्स के समीप क्षेत्र भी रोगग्रस्त थे इसलिए बाईपास संभव नहीं था।फिर डॉ. तिवारी ने मरीज के परिवार से चर्चा की और तीनों धमनियों में स्टेंटिंग के साथ एंजियोप्लास्टी की और कोरोनरी के समीप भाग को डीईबी (ड्रग एल्यूटिंग बैलून) से फैलाया गया।

इस मरीज में 3 ड्रग एल्यूटिंग बैलून (डीईबी ) का इस्तेमाल किया गया था और यह मध्य भारत में इस तरह का पहला मामला था। हृदय की तीनों धमनियों में चार स्टेंट डाले गए।

ड्रग एल्यूटिंग बैलून (डीईबी) का उपयोग छोटे वेसल्स,डिफ्यूज रोग, विभाजन,यदि स्टेंट क्रॉस नहीं करता है, उच्च रक्तस्राव जोखिम वाले रोगी जहां रक्त को पतला करने वाली दवाइयां लंबे समय तक नहीं दी जा सकती , निचले अंग के छोटे वेसल्स में किया जा सकता है ।

ड्रग एल्यूटिंग बैलून (डीईबी) स्टेंट के लिए एक विकल्प नहीं हैं, लेकिन कुछ मामलों में विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है जहां कुछ संकेत दिया गया है ।

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