बिटकॉइन में निवेश और 30% ब्याज का लालच दिखाकर 9 लाख की चपत

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नागपूर दिनांक 30 जून ( शहर प्रतिनिधी)

एक व्यक्ति को निवेश करने पर बिटकॉइन में निवेश करने पर अधिक ब्याज व कमीशन देने का लालच देकर दो आरोपियों ने 9 लाख की चपत लगा दी। पीड़ित अविनाश रघुनाथराव वसुले ने खुद 7 लाख रुपए और मां के नाम पर जमा दो लाख रुपए भी आरोपियों के बैंक खाते में जमा कर दिया।

अविनाश प्रिंट अॉफसेट शुरू करना चाहता था इसलिए उसने यह सोचकर निवेश कर दिया कि उसे अधिक पैसे मिल जाएंगे तो आसानी से प्रिंट अॉफसेट शुरू कर सकेगा। आरोपियों ने बीट क्वाइन और अन्य प्रकार का निवेश करने का लालच दिया था।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्लाॅट नं. 37, देवतले ले-आउट अंबाझरी निवासी अविनाश रघुनाथराव वसुले (48) ने अंबाझरी थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है।

उन्होंने पुलिस को बताया कि वह प्रिंट अॉफसेट शुरू करने वाला था। इस दौरान उसे इंटरनेट के माध्यम से जानकारी मिली कि कुछ लोगों की कंपनी में निवेश करने पर अच्छा खासा कमीशन और ब्याज दे रहे हैं।

उसने इंटरनेट पर आई इस जानकारी के अाधार पर आरोपी अजय गोविंद दोडमनी (29) प्लाॅट नंबर 343, हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी, जवारी नगर, संाकवाल, गोवा और सुकांता रंणजीत भौमिक (40) पणजी, गोवा निवासी की कंपनी में 4 अगस्त 2017 से 10 अक्टूबर 2017 के दरमियान करीब 9 लाख रुपए निवेश कर दिया। आरोपियों ने जब उसे कोई कमीशन और ब्याज नहीं दिया तो छानबीन करने पर पता चला कि उनका असली पता 26/1 आरलन्स डाउन टेरिस देशप्रिया पार्क कोलकता है, गोवा का पता उनका फर्जी था।

झांसे में आया अविनाश :

आरोपियों ने अविनाश को विविध प्रकार का ऑफर देते हुए निवेश रकम पर 10, 20, 30 प्रतिशत ब्याज देने का आश्वासन दिया। अविनाश और उसके दोस्त को आरोपियों की बातों पर भरोसा हो गया तब अविनाश ने 9 लाख रुपए निवेश कर दिया। अविनाश ने आरोपियों के कोटक महंेद्र बैंक के खाता नंबर 00122291039 में कैनरा बैंक गांधी नगर नागपुर के खाते से 4 अगस्त 2017 को अलग-अलग समय में 7 लाख रुपए जमा कर दिया। अविनाश ने मां के खाते से 9 अगस्त 2017 को 2 लाख रुपए आरोपियों के उक्त खाते में डाल दिया।

आरोपी पैसे जमा होने पर अविनाश को कंपनी के खाते में पैसे जमा होने के बारे में ईमेल भेजता था। इससे अविनाश को यकीन हो गया था। जब अविनाश को कोई ब्याज और कमीशन नहीं मिला तब उसने अंबाझरी थाने में शिकायत की। करीब 5 वर्ष बाद इसमें धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।

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