भारत दिनांक 12 नवंबर (विशेष प्रतिनिधि)
कोरोना अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हो पाया था कि एक और नए वायरस ने दस्तक दे दी है। केरल के वायनाड जिले में नोरोवायरस मामलों (Norovirus Case In Kerala) ने मुसीबत बढ़ा दी है। मामलों की पुष्टि होने के एक दिन बाद शुक्रवार को केरल सरकार ने कहा कि लोगों को इस संक्रामक वायरस के खिलाफ सजग रहने की जरूरत है। दरअसल दो सप्ताह पहले वायनाड जिले के विथिरी के पास पुकोडे में एक पशु चिकित्सा महाविद्यालय के लगभग 13 छात्रों में दुर्लभ नोरोवायरस संक्रमण की सूचना मिली थी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि हालात को हालांकि नियंत्रण में लाया जा चुका है और आगे प्रसार की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे निवारक उपायों के हिस्से के रूप में जागरूकता कक्षाएं आयोजित करने के अलावा पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के छात्रों के आंकड़ों का एक संग्रह तैयार कर रहे हैं।
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों में मिला संक्रमण
पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि संक्रमण सबसे पहले परिसर के बाहर छात्रावासों में रहने वाले छात्रों में पाया गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने नमूने शीघ्रता से एकत्र किए और उन्हें परीक्षण के लिए अलाप्पुझा में विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेज दिया। इसके संक्रमण से पीड़ित को उल्टी और दस्त होने लगते हैं।
रहना होगा सतर्क- केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने यहां स्वास्थ्य अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता की और वायनाड की स्थिति का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्री ने अधिकारियों को विषाणु के प्रसार को रोकने के लिए गतिविधियों को तेज करने का निर्देश दिया। इसमें कहा गया है कि फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है लेकिन सभी को सतर्क रहना चाहिए।
क्या है नोरोवायरस?
कोरोना वायरस की तरह ही नोरोवायरस भी एक संक्रामक संक्रमण है. ये डायरिया, उल्टी, मतली और पेट दर्द की वजह बनता है. पब्लिक हेल्थ के मुताबिक, संक्रमित लोगों या दूषित सतह के संपर्क में आने से ये आसानी से फैल सकता है लेकिन संक्रमित लोगों में से मात्र कुछ ही दूसरे शख्स को बीमार कर सकते हैं. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने उसे ‘विंटर वोमिटिंग बग’ बताया है और आम तौर से सर्दी के महीनों में हमला करता है. अधिकतर संक्रमण की वजह बीमार लोगों के संपर्क या दूषित सतह या दूषित फूड या ड्रिंक का सेवन होता है.






