यूएन में संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनावायरस पाकिस्तान अफगानिस्तान और आतंकवाद पर अपनी दो टूक राय रखी जाने उनके संबोधन की विशेष बाते…..
मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिसे मदर ऑफ डेमोक्रेसी का गौरव हासिल है।
हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। एक ऐसा देश, जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अलग-अलग रहन सहन, खान-पान है। ये वाइब्रेंट डेमोक्रेसी का उदाहरण है।
ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन की टी स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार भारत के पीएम के तौर पर UNGA को संबोधित कर रहा है।
भारत का वैक्सीन डिलीवरी प्लेटफॉर्म कोविन एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज लगाने के लिए डिजिटल सहायता दे रहा है।
मैं UNGA को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल से ज्यादा आयु के सभी लोगों को लगाया जा सकता है।
दूषित जल, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए 17 करोड़ से ज्यादा घरों तक पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चल रहा हैं।
भारत के वैज्ञानिक एक नेजल वैक्सीन के बनाने में भी लगे हैं। मानवता के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए भारत ने एक बार फिर दुनिया के जरूरतमंदों को वैक्सीन देनी शुरू कर दी है।
मैं आज दुनिया भर के वैक्सीन मैन्युफैक्चर्स को भी आमंत्रित करता हूं कि आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए।
जो देश आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है।
ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो।
हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा वहां कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश न करे।
इस समय अफगानिस्तान की जनता को वहां की महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक आबादी को मदद की जरूरत है। इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।
हमारे समुद्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी हैं। इन्हें हमें एक्सपैंशन और एक्सक्लूजन की दौड़ से बचाकर रखना होगा।






